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मेरा बचपन  इलाहाबाद में बीता है | बचपन में अपने आसपास के बच्चों को conventschool में जाते देख मेरी भी इच्छा होती थी कि मेरी पढ़ाई हिंदी माध्यम की जगह अंग्रेजी माध्यम से हो | School के बाद कॉलेज में A TO ZENGLISH SYLLABUS से जब  पाला पड़ा तो अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों  की अपेक्षा हिंदी माध्यम से होने की वजह से मुझे अच्छी खासी परेशानी झेलनी पड़ी यह अलग बात है कि हमारी अंग्रेज़ी की नीव मज़बूत होने की वजह से  कॉलेज पूरा होते होते  हम अंग्रेजी के अभ्यस्त चुके थे |  अपने अतिरिक्त जेब खर्च को पूरा करने के लिए हमने अपनी सहेली की सलाह पर एक औसत दर्जे के convent school में पढ़ाने की ठानी |  इस school kemanagement ने हमें 2 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कही क्योंकि रिजल्ट आने में 1 माह का समय शेष था | हमने भी हामी भर दी |  धीरे धीरे हमें इस convent schoolके कुछ गुप्त नियम ज्ञात हुए जो निम्न वत है --- 1.School 8:00 बजे सुबह शुरू होता है तो यदि शिक्षिका 8:30 पर आई तो उसके आधे दिन का वेतन कटेगा | ( अब तक के जीवन में मैंकभी भी कहीं भी लेटलतीफ नहीं हुई अतः मुझे इस नियम से कोई समस्या नहीं थी|) 2.इस …

अनुसुइया के परमहंस जी

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अनुसुइया के परमहंस जी - स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी द्वारा रची किताब है | यह हमें भगवान् के उस रूप के दर्शन कराती है जो यह बताता है के ईश्वर प्राप्ति के लिए रूढियो के जरूरत नहीं है | जरूरत है तो उस परमात्मा के प्रति सच्चे अनुराग की और परमात्मा के आज्ञा पालन के लिए हर संभव तैयार रहने की | ये किताब ब्ताब्त है स्वामी जी के गुरुवर के बारे में उनके जीवनी के बारे में | ये उम्मीद दिलाती है के अगर हम भी कोशिश करेंगे तो वो परमात्मा एक दिन हमसे भी जरूर बातें करेगा | ये किताब बताती है के इश्वर प्राप्ति के लिए धंटे आरती और चढ़ावे की जरूरत नहीं जरूरत है तो सरल ह्रदय की ,सच्ची निष्ठा की और लगन की ...
अध्यायों के नाम १. जीवन – परिचय २. बाल्य जीवन की विलक्षण घटना ३. शालेय शिक्षा ४. व्यायाम की प्रेणना ५. वैवाहिक जीवन ६. आकाशवाणी एवं संत मिलन ७. संत से प्राप्त आशीर्वाद ८. वृद्धाद्वारा तरुणी का संदेश ९. सद्गुरु दर्शन




अध्याय क्रम १०. भजन की शुरुआत ११.सत्संगी महाराज १२. भजन की जागृति १३. प्रभातफेरी १४. इष्ट की व्यापकता में विश्वास १५.सद्गुरु कृपा से मन का रुकना १६.नल पर…

Hidden face of LOA - आकर्षण के नियम का छुपा हुआ चेहरा

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पिछले कुछ समय से आकर्षण का नियम अथवा आकर्षण का सिद्धांत काफी प्रसिद्धि बटोर रहा है | आकर्षण का नियम या फिर law ऑफ़ अट्रैक्शन तब सुर्ख़ियों में आया जब रोंदा ब्य्रेना नामक लेखिका की लिखी किताब और मूवी "द सीक्रेट" नाम से बाज़ार में आई | आप जान  कर हैरान रह जायेंगे की इस बुक में आपको सिर्फ सिमित जानकारी दी गयी है | निश्चित तौर पर इसमें दिए गये उपायों को आजमा कर  आप काफी कुछ पा सकते है पर क्या आप यह जानते है कि यह ब्रह्माण्ड का अकेला नियम नहीं है  |इसके साथ ही ११ नियम और है जो आपके निर्णय को और आपकी किस्मत को और आपके जीवन को कण्ट्रोल करते है |
आइये जानते है आकर्षण के नियम की कुछ अनोखी बाते
आकर्षण का नियम अथवा आकर्षण का सिद्धांत  हमेशा कार्य करता है , यानी की हर वो चीज जिसकी आपने दिल से ख्वाहिश करी है आकर्षण के नियम के अनुसार आपको दे दी जाएगी | यंहा तक की अगर इस जन्म में आपकी कोई ख्वाहिश पूरी नहीं हो पायी तो वो आपके आने वाले जन्म में पूरी हो जाएगी | और यदि आपने अपनी इक्छाओ या चाहतो  पर नियंत्रण करना ना सीखा तो  यही आकर्षण का नियम आपके अनंत जन्मो का कारण और अनंत कर्मो का कारण भी…

Indian Art &craft -Marble powder

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कौन है आपके इष्ट ?

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तो  सबसे पहले अपना एक इष्ट निश्चित कर लेना चाहिए-
हर आदमी का अपना एक इष्ट होता है-होना चाहिए। इष्ट उसे कहते हैं कि जो नाना प्रकार
के अनिष्टों को, दिक्कतों को, हर प्रकार के हमारे कष्टों को आपत्तियों को नष्ट करने में सर्मथ होता है। उसको इष्ट कहते हैं। वह तुम्हारा पूज्य होगा, तुम्हारा देवता होगा और उसके प्रति तुम्हारी अधिकतम श्रद्धा होनी चाहिए। यह अब आप निश्चित कर सकते हैं कि आप की श्रद्धा सबसे अधिक किसमें है उनमें राम, शिव, हनुमान, देवी, देवता, माता, पिता अथवा गुरु कोई भी हो सकते हैं या फिर स्वयं में  । यह आपको खुद निश्चित करना पडे़गा। जिसमें सबसे ज्यादा श्रद्धा और प्रेम हो, जिसे आप सबसे ज्यादा मानते हों वही आपका इष्ट है।
तो जो नन्हा सा प्रेमी साधक है उसका सबसे पहला कर्तव्य है कि वो अपना इष्ट निश्चित करे, और अपनी उस नन्ही सी श्रद्धा को इधर-उधर के अन्य देवी देवता ,  अंधविश्वास और अधूरी मान्यताओं में समर्पित न करे। आप जितना भी श्रद्धा रूपी,प्रेम रूपी अपना भक्तिभाव ईश्वर को दान करना चाहते हैं,वह अपने इष्ट को दान करिये।

ढूंढें इष्ट का एक अथवा ढाई अक्षर का एक नाम(आपका इष्ट मंत्र )

इष्ट निश्च…

ध्यान के शुरुवाती कदम

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शुरुवात में एकान्त में बैठकर ध्यान और भजन  करना चाहिए। जो अनुकूल पड़े वह आसन लगाइए। हां, तो कोई भी आसन हो, तुम्हें आपको  बैठने से कमर में दर्द आ गया, या और कहीं दर्द हो गया, या अभ्यास नहीं है- तो उसको बदल दिया जा सकता है। फिर शुरू करो। लेटकर करो-अगर पड़े-पड़े नींद आ जाती है- खड़े-खड़े करो। अगर ऐसे नहीं आता है, तो चलते-चलते करो। करना है, इसमें कोई दिक्कत नहीं। आसन बदला जा
सकता है। और यह हम पहले कह चुके हैं, कि साधन अबाधित होना चाहिए। ऐसा नहीं कि हम बैठ जायं, तब तो हमारा ध्यान लग जाय, और जब खड़े हो जायं तो लगे ही नहीं।   तब तो फिर माया ने अच्छा न हमसे पीठ फेरी? जब हम ध्यान करेंगे, तब तो भगवान हमारे पास रहेंगे, हमको बचा लेंगे। और जब खड़े हैं-चलते हैं, खाते हैं और ध्यान नहीं है, तो फिर उस समय तो भगवान रहेंगे नहीं।
भगवान नहीं रहेंगे, तो माया आ जायगी। जब भगवान नहीं रहेंगे, तो (हमारे मन में) माया अधिकार कर लेगी। तो ऐसे कैसे काम चलेगा? इसलिये हम बैठे रहें, तो भगवान को लिये रहें। खड़े रहें तो भी, भगवान को लिये रहें। सो जायं तो भी, भगवान ही बैठा रहे अंदर। हम कभी जगह न दें, अन्य को।अगर जगह देते हैं, त…

ध्याता और ध्येय के मिलन से ध्यान घटता है - when soul and supreme soul meet , meditation occur

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ध्यान  चाहे 10 घण्टे करो, 24 घण्टे करो, 1 मिनट करो लेकिन उसमें मन को निशाने पर पहुंचना चाहिये। जो सबसे महान है, सबसे परे है, उसमें मन को टच होना चाहिये। अगर उससे मन टच होता है, तो साँसे   खड़ी हो जायेगी और साँसों के  खड़ी हो जाने पर(मन के ध्यान में रुकने  पर ), पीछे के  संस्कार (बुरी आदतें , बुरी यांदें , पाप कर्म , बुरे ग्रहों की स्थिति ) जल जाएंगें , तो आप मुक्त  मुक्त हो गये। फिर बोलो, हंसो, खेलो, कूदो, मस्ती काटो, ऐसा सिद्धान्त है , मतलब हर समय ह्रदय में शान्ति और आनंद की स्थिति होगी ।

 लेकिन बताने से, यह होता नहीं है। करने से होता है --
करने वाले की रहनी कुछ ऐसी  हो जा ती है कि वह खाता है लेकिन खाने के संस्कार नहीं बनते। सुनता है लेकिन सुनने के संस्कार नहीं बनते। ध्यान की परमावस्था में विपरीत परिस्थियां भी अनुकूल लगेंगी आपके favour में लगेंगी , और इससे पहले की प्रतिकूल परिस्थितियाँ आपको डिस्टर्ब करें वे आपके अनुकूल हो जायेंगी | जीवन ठीक वैसा हो जायेगा जैसा के सामान्य परिस्थियों में एक बच्चे का होता  है | सरल जीवन हो जायेगा | ना अतीत की कडवी यादें सताएंगी न भविष्य क…