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How do negative feelings or negative vibration prevent Spiritual Ascension ?

Here question arise how does this vibes prevent from spiritual development.
 well when someone practice spirituality . he start to attract higher energies , higher vibes in form of peace primly. these energies first enter into his energy field and start removing bad energies, bad vibrations of one's pain ,depression but if he is continuing with non veg diet . It increase workload for positive energy.The battle between good and bad energies result in form of detoxification,which  have to faced by person who is practicing spirituality. That'swhy if he is doing his practice along with taking non veg diet he is just empowering both energies.

        Like doing practice he give more positive energy to his energy field and simultaneously he is also taking other bad vibes and provide more negative vibes to his energy field .
in such cases sometime he feel very positive ,peace , love when higher power get stronger than lower power and sometime he may feel excess feeling of lust ,greed,ra…

Is Non-veg diet ok in Spiritual Progression ?

For Centuries monks ,spiritual teachers or many ascended masters are telling you to avoid Non veg diet if you are practicing spirituality .
of course there are exceptional cases too, presents like every field of life it used to be .
the concern of people special who love non veg and want to practice spiritualily is Why ??? Why do i need to give up meat,beef etc? further their objection, " then why do God made human omnivorous rather than herbivorous only? What happen if i take non veg diet and practice spirituality along with?


OK so i try to tell on behalf of ascended masters.


  Death is painful for almost every living being except those who consider death is only transformation and migration from one dimention to another.
when cattle ,birds,fishes are killed for consumption as meal ,we never think what were going into those living beings, how they do feel at the time of near death,how much level of their sorrowfulness,pain for departure untimely from there families ,their body t…

छुट्टी की छुट्टी काहे की छुट्टी

गुरु तेग बहादुर शहीद दिवस के लक्ष्य में सरकारी स्कूल में अवकाश(holyday) था | पहले यह अवकाश 24 नवंबर 2017 को घोषित हुआ और बाद में 23 नवंबर 2017 को घोषित(declared) हो गया | आधुनिक टेक्नोलॉजी और WhatsApp ग्रुप के बदौलत लगभग सभी शिक्षकों को यह मैसेज मिल गया कि अवकाश 1 दिन पहले हैं | मेरी मां जो स्वयं एक शिक्षिका है इत्तेफाक से 1 दिन पहले उन्होंने WhatsAppखोला ही नहीं ( यद्यपि हमारी पीढ़ी के साथ साथ चलने वाली माता जी के विषय में यह आश्चर्यचकित कर देने वाली घटना थी, पर यह घट ही गई और वह सुबह स्कूल को पहुंच गई | उनका विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में पड़ता है | नवंबर के आखिरी सप्ताह में जब शहर में ठंड थी | आप स्वतः समझ लें , ग्रामीण क्षेत्र में सुबह कितनी ठंड होती होगी, घना कोहरा छाया रहता है और ऐसे में उनका विद्यालय सड़क पर है | जब माता जी वहां पहुंची | तब उन्हें विद्यालय बंद मिला और बच्चों का झुंड सड़क किनारे खेलते, उछलता -कूदता ,मस्ती करता हुआ मिला | बच्चे इस इंतजार में थे ,कि शायद विद्यालय आज लेट खुलेगा और जब मां ने mobile से अपने साथ के अन्य शिक्षक- शिक्षिकाओं से संपर्क साधा तब पता चला की छु…

कान्वेंट स्कूल के फंदे

मेरा बचपन  इलाहाबाद में बीता है | बचपन में अपने आसपास के बच्चों को conventschool में जाते देख मेरी भी इच्छा होती थी कि मेरी पढ़ाई हिंदी माध्यम की जगह अंग्रेजी माध्यम से हो | School के बाद कॉलेज में A TO ZENGLISH SYLLABUS से जब  पाला पड़ा तो अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों  की अपेक्षा हिंदी माध्यम से होने की वजह से मुझे अच्छी खासी परेशानी झेलनी पड़ी यह अलग बात है कि हमारी अंग्रेज़ी की नीव मज़बूत होने की वजह से  कॉलेज पूरा होते होते  हम अंग्रेजी के अभ्यस्त चुके थे |  अपने अतिरिक्त जेब खर्च को पूरा करने के लिए हमने अपनी सहेली की सलाह पर एक औसत दर्जे के convent school में पढ़ाने की ठानी |  इस school kemanagement ने हमें 2 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कही क्योंकि रिजल्ट आने में 1 माह का समय शेष था | हमने भी हामी भर दी |  धीरे धीरे हमें इस convent schoolके कुछ गुप्त नियम ज्ञात हुए जो निम्न वत है --- 1.School 8:00 बजे सुबह शुरू होता है तो यदि शिक्षिका 8:30 पर आई तो उसके आधे दिन का वेतन कटेगा | ( अब तक के जीवन में मैंकभी भी कहीं भी लेटलतीफ नहीं हुई अतः मुझे इस नियम से कोई समस्या नहीं थी|) 2.इस …

क्या आप और आपका परिवार सम्पूर्ण भोजन करते है ?

हिन्दू पुराणोंमें एक कथा आती है ,जिसके तीन मुख्य पात्र है – धन के देवता कुबेर ,गणेश जी और भगवान् शिव | कुबेर एक बार भगवान् शिव को अपने घर आमंत्रित करते है | कुबेर का वास्तविक उद्देश्य संसार के सामने अपनी अकूत धन संपदा का प्रदर्शन करना होता है सो वह सभी गणमान्य जनों को अपने यंहा भोजन हेतु आमंत्रित करते है | अन्तर्यामी शिव आमंत्रण के पीछे छुपे इस अहंकार भरे उद्देश्य को जान लेते है और अपने परिवार के ओर से अपने पुत्र गणेश को भोजन में शामिल होने के लिए भेजते है | गणेश के कुबेर के महल पर पहुँचने पर कुबेर अहंकारवश .गणेश जी को उचित आदर नहीं देते | कथा आगे बढती है और देखा यह जाता है , अकूत धन-संपदा के स्वामी कुबेर गणेश जी की भूख शांत नहीं कर पाते उन्हें अपने भोजन से तृप्त नहीं कर पाते | अन्त्वोगात्वा कुबेर को अपनी भूल का एहसास होता है और उनके गणेश जी से क्षमा माँगने पर और गणेश जी को उचित आदर देकर भोजन कराने पर गणेश जी की भूख शांत होती है |
ये कहानी हमे बताना क्या चाहती है और इस लेख से इसका क्या सम्बन्ध है ? हममे से ज्यादातर यह सोचेंगे की यही शिक्षा मिलती है अहंकार नही करना चाहिए पर यह सिर्फ एक बा…