अनुसुइया के परमहंस जी

अनुसुइया के परमहंस जी - स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी द्वारा रची किताब है | यह हमें भगवान् के उस रूप के दर्शन कराती है जो यह बताता है के ईश्वर प्राप्ति के लिए रूढियो के जरूरत नहीं है | जरूरत है तो उस परमात्मा के प्रति सच्चे अनुराग की और परमात्मा के आज्ञा पालन के लिए हर संभव तैयार रहने की | ये किताब ब्ताब्त है स्वामी जी के गुरुवर के बारे में उनके जीवनी के बारे में | ये उम्मीद दिलाती है के अगर हम भी कोशिश करेंगे तो वो परमात्मा एक दिन हमसे भी जरूर बातें करेगा | ये किताब बताती है के इश्वर प्राप्ति के लिए धंटे आरती और चढ़ावे की जरूरत नहीं जरूरत है तो सरल ह्रदय की ,सच्ची निष्ठा की और लगन की ...
अध्यायों के नाम १. जीवन – परिचय २. बाल्य जीवन की विलक्षण घटना ३. शालेय शिक्षा ४. व्यायाम की प्रेणना ५. वैवाहिक जीवन ६. आकाशवाणी एवं संत मिलन ७. संत से प्राप्त आशीर्वाद ८. वृद्धाद्वारा तरुणी का संदेश ९. सद्गुरु दर्शन




अध्याय क्रम १०. भजन की शुरुआत ११.सत्संगी महाराज १२. भजन की जागृति १३. प्रभातफेरी १४. इष्ट की व्यापकता में विश्वास १५.सद्गुरु कृपा से मन का रुकना १६.नल पर गुरुदेव का स्नान एवं चेतावनी १७.धर्मपत्नी को उपदेश १८. गृह में भयंकर उत्पात




अध्याय के नाम १९.भजन परीक्षा की कसौटी पर २०.क्षणाशक्ति इष्ट पर आदेश २१. प्रयाग की घटना २२.बैरागिया नाला २३.गंगा तट पर विचरण २४.परिभ्रमण काल में जौनपुर २५.जौनपुर के कब्रिस्तान में २६.रामनगर में भक्तों के बीच २७.शिशिर काल में दिगंबरा अवस्था

२८.कर्मनाशा के किनारे देवी मंदिर में २९.देहध्यास का त्याग ३०.संतो के संग माघ मेला प्रयाग में ३१.माघ मेले में सिपाही द्वारा हाथ मरोड़ने की घटना ३२.माघ मेले में वैष्णव संतो द्वारा धुन तापने से रोकना ३३.माघ मेला में सेठो द्वारा निमंत्रण एवं जल वृष्टि ३४.रेल यात्रा में सिंधियों से विवाद ३५.उज्जैन कुंभ में शंकराचार्य द्वारा दीक्षा –संस्कार ३६.भंडारे से बिना प्रसाद ग्रहण किए लौटना



  ३७.उज्जैन मेले में नौ दिवसीय भंडारा ३८.यमुना किनारे विचरण ३९.फकीर के साथ भोजन ४०.यमुना तट पर माताओं द्वारा भजन ४१.आगरा गल्ला मंडी ४२.कुपात्र को दान ४३.कंचन कामिनी से निवृत्ति ४४.हरिद्वार से प्रस्थान ४५.हिमालय की तलहटी में


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