ऊर्जा

ऊर्जा क्या है ,और यह  कितने प्रकार की होती है ?
यदि आप विज्ञान के विद्यार्थी है | तो आपको यह पता होगा कि संसार में दिखने वाली सभी चीज़े ऊर्जा का ही व्यक्त अथवा अव्यक्त रूप है | ऊर्जा दृश्य ,अदृश्य  दोनों होती है | यही ऊर्जा जब अपने तीव्रतम रूप में होती है तो शक्ति कहलाती है | इसी ऊर्जा जो अलग अलग धर्मो में अलग अलग रूपों में व्यक्त किया गया है ,जैसे देवी, देवता , राछस, दानव, फ़रिश्ते और शैतान | अगर शरीर से सारी ऊर्जा खीच ली जाएँ तो आत्मा तुरंत शरीर छोड़ देगी |ऊर्जा की मात्रा यह निर्धारित करती है कि कौन  सा आकर , ऊर्जा लेगी - जैसे अत्यधिक तेज़  सकारात्मक ऊर्जा देवता का रूप तथा अत्यधिक नकारात्मकऊर्जा दानव का रूप लेती है | यदि आप ऊर्जा को पहचानना सीख जाएँ तो आप किसी भी व्यक्ति के वास्तविक नेचर को उसे देखते ही महसूस कर लेंगे  |  आध्यात्मिकता में ऊर्जा मुख्यतः दो रूपों में  क्रमशः 

  1. सकारात्मत ऊर्जा  (positive energy)  , दैवीयऊर्जा \ सात्विक ऊर्जा   एवम
  2.  नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) \ तामसिक ऊर्जा \शैतानी शक्ति  \काली शक्ति ,बाटी गयी है |
सकारात्मत ऊर्जा (Posetive energy)
सकारात्मत ऊर्जा स्वयं को कई रूपों में व्यक्त करती है , जैसे – प्रेम ,ख़ुशी , दया , कृतज्ञता ,स्वस्थ शरीर , स्वस्थवातावरण आदि |
  सकारात्मक उर्जा  अपने तीव्रतम रूप में आत्मा के पास शक्ति के रूम में समायी रहती है |शरीर और जीवन में इसकी अधिक मात्रा ,करुणा , प्रेम ,  शान्ति  , सफलता  व समृद्धि देती है | अगर  शरीर में सकारत्मक ऊर्जा की कमी हो जाये तो शरीर  तरह तरह के  रोगो को पकड़ लेगा |
हमारे पास तथा हमारे चारो तरफ सकारात्मक उर्जा कई रूपों में रहती है | हमारी उपलब्धियों में, हमारे रिश्तो में ,हमारे ख़ुशी में हमारे दोस्तों में , मंदिरों में और भी कई व्यक्त रूपों में ,पर यही ऊर्जा अदृश्य रूप से भी हमारे आस पास रहती है | इस उर्जा का उद्देश्य सिर्फ और  सिर्फ हमारी
सहायता करना होता है |यह हर एक पल हमारीसहायता के लिए तत्पर रहती है और यही चाहती है की जैसे हम किसी समस्या में उलझे वहतुरंत हमारे समस्या के समाधान के उपाय बताये | हमारी चारो तरफ जो सकारात्मक उर्जारहती है उसे कई नाम दिए गये जैसे दैवीय आत्माए ,अन्जेल्स ,गुरु |
हम सभी कुछ निश्चित उद्देश्य कुछ निश्चित टास्क को पूरा करने के लिए जन्म लेते है |
हम तो दुनिया में आँखे खोलते ही उन उद्देश्यों को भूल जाते है पर दैवीय उर्जा नहीं भूलती ये तरह तरह से हमें ये याद दिलाती रहती है की हमने जन्म  क्यु लिया है | ठीक उसी  तरह जैसे जब हम खेलने में व्यस्त हो जातें थे बचपन में तो हमारे माता पिता हमें याद दिलाये थे की हमे पढाई भी करनी है | या हम अपने बच्चो को याद दिलाते है | उसके बावजूद हममे से कई ऐसे होंगे जो याद दिलाने के बावजूद अपना कार्य नहीं पूरा करते थे | आप बताइये ऐसे बच्चो के साथ हम क्या करेंगे | सही दंड देंगे | आध्यात्मिक रूप से यंहा ये काम करती है नकारात्मक ऊर्जा | क्या आपके घर में कोई ऐसा  है जो आपकी गलती करने पर आपको डांट खाने से बचा लेता था  | कोई .....जो आपके कार्यो को पूरा करने में चुपके -चुपके सहयता करता था | यंहा तक की माँ बाप को भी ये पता रहता था कि आपकी मदद की जा रही है | चहरे पर कठोरता का भाव लिए रहने के बावजूद वो मन ही मन आन्दित होते थे की हमारी  मदद की गयी | यंहा पर भी ऐसा ही सिस्टम है ,यंहा पर भी दैवीय सहायता हमें बचाती है हमारे कार्यो को पूरा करने में सहयोग करती है | अंतर इतना है की माँ बाप कभी किसी बच्चे से नहीं कहते की  हम जैसे शरारती की मदद कर दो ,लेकिन उस परमात्मा का यह सीधा आदेश होता है कि हमारी मदद करनी है |


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