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ईश्वर द्वारा हर तरह से हमारा कल्याण


ईश्वर द्वारा बनाई हुई  सभी उर्जाऐं ,  हमारे कल्याण के लिए है | फिर वो


नकारात्मक ऊर्जा ही क्यों ना हो | नकारात्मक ऊर्जा का जीवन में आना सृष्टि द्वारा सीधा सन्देश होता है , कि हमारी शक्तियों को जागृत करने का समय आ गया है अथवा वो कमजोर पड़ रही है | नकारात्मक ऊर्जा  एक   उत्प्रेरक की तरह कार्य करती है  | आप खुद ही सोचिये  एक इंसान , अगर अचानक मर जाए और उसके बाद , उसके होने का एहसास हो , तो हम डर जाते है | हम उसे भूत- प्रेत सारी संज्ञा दे डालते है उससे डरेंगे वो जिस जगह पर महसूस होता है या दिख जाता है , हमारी घिघ्घी बन्ध जाती है | आखिर हम डरते क्यों है ? जो जीवन भर कमजोर रहा जो जीवन भर बेबस रहा उसकी आत्मा में ऐसी कौन सी तूफानी शक्ति आ गयी है  ,जो वो हमारा कुछ बिगाड़ लेगा | आप शायद  उत्तर देंगे की अरे अब वो आत्मा हो गयी है आत्मा में बहुत शक्ति रहती है तो हें प्रभु आत्मा तो शक्तिशाली आपकी भी होगी उस बेचारी आत्मा के पास शरीर नही है ।  आपके पास तो शरीर भी है ।  आप अपनी शक्तियों को क्यों भूले हुए हैं | आप सोचिये विचारिए कि आप के लिए क्या मुश्किल है ? अब आप इस बात पर भी ध्यान दें , कि अगर आप की आत्मिक शक्ति कमजोर पड़ रही है तो प्रकृति आपको कैसे बताएगी ? आपके सामने एक समस्या रख कर ,  एक नकारात्मक उर्जा रख कर | मान ले एक व्यक्ति का जन्म गरीब परिवेश में होता है  ऐसे में उसका  प्राथमिक उद्देश्य क्या हैं ? गरीबी के हालात  से ऊपर उठना |
तो प्रक्र्ति ने उसको ऐसी स्थिति में इसलिए डाला क्युकी वह  अपने अन्दर की उस शक्ति को जागृत करें  जो की इस समस्या का समाधान करे | एक बार उसने उस शक्ति को जागृत कर लिया तो यह आत्मा की उपलब्धि हमेशा के लिये साथ रहेगी मतलब अगले जन्मो में कम से कम वह गरीबी में तो नहीं जीवन यापन करेंगा  | खासतौर से अगर इसी  समस्या को देखा जाये तो ऐसी कौन - सी शक्ति है जिसे जागृत करना  है ? वो  है उसकी मूलाधार चक्र में समाई हुई शक्ति | उसको  अपने मूलाधार चक्र को जागृत करना है | यदि आप किसी ऊर्जा के जानकार से मिलते है तो वो आपके  ऊर्जा मंडल को स्कैन करके ये बता देगा कि कौन सा चक्र या तो बंद है या  फिर कमजोर है |

आप खुद भी इस बात का पता लगा सकते है ,कि प्रकृति आपकी किस शक्ति को जगाने की कोशिश कर रही है | जैसे अगर नाकारत्मक ऊर्जा जिसे हम अब से समस्या कहेंगे ...तो अगर समस्या ज्यादा है तो यह इस तरफ इशारा कर रही है , कि आपके आत्मा की वो शक्ति सोई हुई है अगर समस्या कम है तो यह ये बता रही है की वो खास शक्ति कमजोर है अथवा कमजोर पड़ रही है अगर एक ही समस्या बार बार आ जा रही है तो यह बताती है कि कुछ ऐसा जीवन में हो रहा है जो इस शक्ति की कमजोर कर रहा है | सिर्फ आपको पहचानना सीखना है | मान लीजिये अगर आप प्रेम की , सराहना की , कमी महसूस करते है या आपको ऐसा लगता है की आप तो दूसरो की मदद खूब करते है पर आपकी ज़रुरत के समय लोग गायब हो जाते है , तो यह सृष्टि के तरफ से सीधा सन्देश है , कि अपने ह्रदय चक्र की शक्ति को जगाने का समय आ गया है | सिर्फ इतना ही नहीं अगर आपके घुटने में दर्द है , सियाटिका की समस्या है , बिज़नेस बढ़ नही रहा , भौतिक आवश्यकताए पूरी नही हो रही  है तो ये श्रृष्टि का इशारा है , कि मूलधारा चक्र की जगा लें | यदि आपको जाना अथवा अंजाना डर लगता है , kidney की समस्या है , कमर दर्द रहता है , खुद को अकेला पाते है, यदि आपको आलस महसूस होता है , आपको गुस्सा बहुत आता है ,नाराजगी है , confusion  है ,एलर्जी है या पाचन संबंधी दिक्कत है ,आप प्लानिंग तो खूब करते है पर उसके अनुसार कार्य नहीं कर पाते , खुद को मोटीवेट नही कर पाते तो आपके  स्वाधिष्ठान चक्र (sacral chakra ) या तो कमजोर है या बंद है | यंहा कुछ उदाहरण दिए गये है | कई बार एक ही समस्या आपमें समायी कई शक्तियों को जगाने की कोशिश करती है |
अब इस बात पर भी ध्यान दे कि प्रकृति को समस्या सामने रखने की ज़रुरत ही क्या है ऐसे सीधे सीधे  नही बता सकती तो प्रकृति हमें शुरू शुरू में सीधे सीधे ही बताती है जब हम नही सुनते तब ही समस्या रखती है कुछ ऐसे जैसे बच्चा माँ बाप की बात माने बगैर तब तक पढ़ाई नही करता जब तक की फेल ना हो जाए  और उसके सामने एक समस्या आती है  कि उसके सहपाठी आगे की क्लास में पहुँच गये और वह  पीछे रह गया |
आगे बात करेंगे कि प्रकृति ने आप से बातें करने के लिए और आपकी सहायता के लिए कितनी सुविधाएं दे रखी है ? ईश्वर ने किसी भी समस्या का  सामना करने के लिए आपके लिए क्या क्या व्यवस्था कर रखी है ?
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