भाग २ -- कुछ दिक्कत हो तो याद कर लेना तुम्हारे पीछे स्वयं मैं हूँ .......



पिछले पोस्ट  में हमने यह देखा कि ईश्वर किन-किन रूपों में और किन-किन शक्तियों के साथ हमारे पास  रहते हैं और हमने  यह जान लिया कि हम किसी भी परिस्थिति में अकेले नहीं होते हैं , चाहे सुख हो अथवा दुख हम कभी भी दैवीय शक्तियों के बगैर नहीं रहते हैं |

दैवीय सत्ता को अपने आस-पास महसूस करना बहुत ही सुखद अनुभव होता है | आप जानते हो कि आपके पास कोई है जो आपके सुख को भी जानता है ,आपके दुख को भी जानता है | आप जानते हो कि कोई है जो हर परिस्थिति में , हर हालत में आपका भला ही चाहता है |
आप जानते हो कि कोई है जो हर कीमत में आप के पक्ष में है , आपके  साइड में है | कोई है -- जो बहुत ही आंतरिक स्तर पर यह जानता है कि अगर आपने कुछ किया है तो वह क्यों किया है ? किस मजबूरी में किया है ? और आपको वास्तव में कैसा महसूस हो रहा है ? आखिर ऐसे ही हमारे विद्वानों ने यह थोड़ी ना कहा है , “ भगवान हर पल की खबर रखते हैं | “ कुछ तो वजह होगी !  उन्होंने कुछ तो चिंतन किया होगा और यही वास्तविक वजह  है |
अगर आप अपने बच्चे को डांटकर पश्चाताप कर रहे हैं तो कोई है जिसे यह  सबसे पहले पता चलता है कि आप पछता  रहे हैं यदि आप पश्चाताप कर रहे हैं तो उस समय वह  आप पर मुस्कुरा रहा होता है और यदि आप अपनी गलती को छुपाने के लिए अपने ही मन में तर्क दे रहे होते हैं | तो वह यह भी जानता है कि आपको पश्चाताप कैसे कराना है , “आखिर भगवान सिर्फ आपके साथ छोड़ो ना है  बच्चे का भी है |“  यह  बात हर रिश्ते में लागू होती है|

दैवीय  चेतना को अपने आसपास अनुभव करने पर शुरू शुरू में यह कोई चमत्कार सा लगता है | आप आश्चर्यचकित रहते हो | कभी कभी   डर भी लगता है और यह भी लगता है कि कहीं हम पागल तो नहीं हो गए हैं यह एक अजीब सा अनुभव होता है | हम अपने आस पास भूतों की तो कल्पना करते है पर कण कण में व्याप्त ईश्वरीय चेतना को महसूस नहीं करते | हम  हमारे साथ हमारे दोस्त- यार , परिवार नहीं रहता उस समय  किसी परिस्थिति में  हम , अपने आप को अकेला महसूस करते हैं और एक यह  स्थिति है जब हमें यह पता है कि हमारे आसपास दैवीय  शक्तियां हैं और हम किसी भी हालत में अकेले नहीं होते हैं |
उस समय एक अनोखा सा रिश्ता लगता है  परमात्मा के साथ एक अनोखा सा रिश्ता लगता है प्रकृति के साथ | ऐसा लगता है जैसे कोई हर पल हमारा ध्यान रख रहा  हो | हम चाहे  बड़े हो जाएं  या  बूढ़े हो जाएं | ऐसा लगता है किसी के लिए हम अभी भी नवजात शिशु की तरह है कोई ऐसा है जो हमारी खुशियों में खिलखिला उठता है कोई ऐसा है जो हमारे दुख में हमें समझाने का प्रयत्न करता है | कोशिश करता है कि हम शांत हो जाएं और बिगड़े हुए समय को गुजर जाने दे | कोई ऐसा है जो हमें बताता है कि किसी चैलेंजिंग परिस्थिति को कैसे हैंडल करना है |

आप ही बताइए यह कैसा खेल है छोटी सी समस्या रखना और फिर समस्या के समाधान के लिए पूरी ब्रम्हांड की शक्ति को हमारे पीछे खड़ा कर देना ईश्वर की यह अनुकंपा कुछ ऐसी है की जब जब याद आती है चेहरे पर बस मुस्कुराहट आती है  , आंखों में आंसू आते हैं और हृदय खुशी से रो रहा होता है | प्रेम से भर उठता है | हो सके तो इस एहसास के साथ जिए |
अपने यह अनुभव कई बार मजेदार लगते हैं | हम औरों को बताना चाहते हैं अपने दोस्तों को बताना चाहते हैं  ,पर बता नहीं पाते | हमारे शब्द हमारी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते   और अगर हम बता भी देते है तो  वह यकीन नहीं करते या फिर कहते हैं कि यह सिर्फ आपकी कोरी कल्पना है आपको ऐसा लग रहा होगा कि यह सिर्फ कोरी कल्पना है चलिए देखते हैं क्या आपको आगे भी ऐसा ही लगता है |
आपको लग रहा होगा अच्छा अगर इस तरह  दैवीय शक्तियां मेरे साथ खड़ी है तो मेरी सहायता क्यों नहीं करती मैं फंला फंला  मुसीबतों में पड़ा ............तरह-तरह की समस्याओं का सामना किया ......... सारी ज़िन्दगी इस संघर्ष में गुजर गई ........... तब यह  दैवीय  शक्तियां कहां थी ?.............तब वह भगवान कहां था ? ...............
इसे एक उदाहरण से समझ लेते हैं आपके सामने एक बड़ा लाउडस्पीकर हो बहुत बड़ा और उसमें बहुत तेज ध्वनि में संगीत बज रहा हो अब अगर आपके पास भी कोई खड़ा होगा और वह आपसे कुछ कह रहा होगा तो आप सुन पाएंगे नहीं ना...... आपको बहुत दिक्कत होगी  सुनने में  | ऐसा ही कुछ होता है दैवीय  शक्तियां भी हमसे कह रही होती हैं हमें समझा रही होती हैं समस्या का समाधान बता रही होती है और कई बार तो आने वाली समस्या का  पहले ही समाधान बता देती हैं पर हमें ही नहीं सुनाई देता | क्योंकि यह अंदर की आवाज है बाहर की नहीं ... यह अंदर की तरफ से आती है बाहर की तरफ से नहीं और हमने बाहर अपने जीवन में चारों तरफ बड़े-बड़े लाउडस्पीकर लगा रखे हैं जिसमे हमारे विचार बजते है .... तो हमें सुनाई कहां से देगा लेकिन भगवान के पास हमारी इस समस्या का भी हल है | ईश्वर हम से बात करने के लिए तरह तरह के माध्यम ढूंढते हैं और हम से बात करने के लिए हम कौन कौन सी कोशिश करें ये भी  बताते हैं | यह कुछ इस तरीके से है कि हम किसी समस्या के खाईं के ऊपर खड़े होते हैं और डर रहे होते हैं अब गिरें  तब गिरें  और दूसरी तरफ ईश्वर हमारे हाथ को थामें  , हंस रहे होते हैं... कह रहे होते हैं बेटा तुम्हें जितना डरना  हो डर लो गिरने मैं तुम्हें दूंगा नहीं ...
 समस्या कितनी भी मुश्किल है निकल तो आखिर हम जाते ही हैं ना यह कुछ इसी तरह है |

 आगे आने वाले पोस्ट  में इन सभी माध्यमों की चर्चा होगी |

Comments

Popular posts from this blog

साँसे और आध्यात्मिकता ( Management of breathing and spirituality) पार्ट - 1

कान्वेंट स्कूल के फंदे

After Knowing This , You will Never Walk Alone