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इंद्र की खलबली -जिओ रे बाहुबली

.......तभी रावण का आगमन होता है ....( रावण जो इस समय बैकुंठ में जय नामक द्वारपाल है | )
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रावण (हनुमान जी के तरफ देख कर नाक -भौ सिकोड़ते हुए , फिर भगवान् के तरफ देखते हुए : “प्रभु! इंद्रदेव आपसे मिलाना चाहते है ... उनके साथ एक अप्सरा देवी भी पधारी है |”
ईश्वर (भक्त  के तरफ देखते हुए) : भक्त इनसे मिलो... ये  हमारे बैकुंठ के द्वारपाल है, त्रेता में ये रावण नामक राक्षस थे |
रावण (भक्त  की ओर देखते हुए अभिमान से) – “क्यूँ मुझे जानते हो ?”
भक्त  – “कौन से वाले हो आप !!!!रामानंद सागर वाले रामायण वाले या नए रामायण वाले ??”
रावण – “प्रभु ! वाल्मीकि और तुलसीदास के कई नाम है क्या ? रामानंद सागर  इनमे से कौन है ?”
ईश्वर ( मुस्कुराते हुए )– “इनमे से कोई नहीं है वो एक सीरियल निर्माता व निर्देशक थे | “
भक्त  ( कुछ याद करते हुए बीच में )- “अच्छा अच्छा याद आया आप वोही ना जिसके पुतले को दशहरा में जलाया जाता है ?”
रावण (क्रोध से देखते हुए) – “तुम मुझे ऐसे नहीं याद रख सकते कि मैंने शिव तांडव स्तोत्र की रचना करी ??”
भक्त  – “वो क्या है ??”
हनुमान जी (रावण को  चिढाते हुए) – “मैं समझाता हूँ ... ( भक्त  के तरफ देखते हुए ...)- पुत्र बाहुबली में जो  शिव जी के लिए कैलाश खेर ने गाया न ....वो ही शिव तांडव स्तोत्र ...”
भक्त  – “हाँ हाँ.......... वो तो कैलाश खेर ने बनाया है ना !! ये क्रेडिट क्यों ले रहे है पृथ्वी पर होते तो copyright का केस हो जाता ...”
jio re bahubali -divinecount
हनुमान जी (ठहाके लगाते हुए ) – “नहीं कैलाश ने नहीं रावण ने रचा था ...”
रावण (अपना एकलौता सर धुनते हुए प्रभु से) – “हे अनंत ब्रह्मांडो के स्वामी !  मुझे मेरे कटे गए सिरों को  वापस कर दें.... मैं सबके साथ फाँसी लगा कर मर जाना चाहता हूँ ...पृथ्वी वालो ने हद कर दी है ... कंही भी मेरी कोई credit ही नहीं है ...”
ईश्वर -  “नाराज़ ना हो रावण ...ये भक्त नादान है ,खुद के संस्कृति से अनजान है ...”
भक्त  – “माफ़ करें रावण जी ,,,वैसे मैंने एक बात नोटिस करी आप जब आये तो हनुमान जी को देख कर चिढ रहे थे ऐसा क्यो?”
hasta hua eeshwar
रावण –  “तुम्हारे घर कभी बन्दर ने उत्पात मचाया है ???”
भक्त  – “अरे हाँ ! बड़ी आफत करते थे बन्दर ,सूखने के लिए जो कपडे डालते थे उसे फाड़ दिया करता थे रसोई से खाने का सामन ले कर भाग जाया करते थे ?”
रावण – “जब तुम्हारे घर में थोड़े से बन्दर इतना उत्पात मचाते थे तो सोचो मेरे यंहा तो करोडो करोड़ बन्दर आये थे , पहले तो ये हनुमान ... आकर लंका जला गया ......सारे के सारे कपडे अपनी पूंछ में बान्धवा कर सारे लंका वासियों को वस्त्रविहीन कर दिया...  हम कपडे सिल्वा ही रहे थे की सारी सेना ने चढ़ाई कर दी .... आधे अधूरे कपड़ो में हम युद्ध करने गए तो देखते है  .... कई बन्दर  झुण्ड में बैठ कर एक दुसरे की जुएँ ढूंढ रहे है

eeshwar prithvi ki update lete hai

..तो कुछ ऐवें  ही युद्धास्थली में आराम फरमा रहे है , कोई कोई एक दुसरे की पीठ खुजला रहा है , कोई कोई कपडे खीच के भाग  जाता  कोई सर पर चपत लगा के भाग जाता ....
 कुछ  तो मेरे अशोक वाटिका में फलो के लिए डेरा दाल कर बैठ गए थे ..कुछ  लंका की रसोइयो से खाना चुराने  चले गये    ....
कुछ ऐसे थे कि हमारे राक्षसो को युद्ध के लिए ललकारते थोडा लड़ते फिर मूड बदल जाता तो टहलने चले  जाते थे ....
jio re bahubali divine count
अगर हम राक्षस  किसी और को  अपनी डरावनी माया दिखाते तो उसकी हालत ख़राब हो जाती है..... पर जब इन बंदरो को दिखाते तो कमबख्त  डरने की जगह जम्हाई लेते थे ...
मेरे कई वीर राक्षस  तो इस अजीबो गरीबो लड़ाई

divine count - laughing god

से इतने डिप्रेशन में आ गये थे के खुद की जान खुद से ले के पीछा छुड़ा लेते थे युद्ध से .... तभी से मई इन मरकटो (बंदरो ) से चिढ़ता हूँ | “
ईश्वर – छोडो बीते हुए कल की बातें रावण .... जाओ इंद्र... को आदर सहित ले आओ.... बड़ी देर से वो प्रतीक्षा कर रहे है | “
(रावण का प्रस्थान व इंद्र का प्रवेश एक अप्सरा के साथ )
इंद्र : “त्राहिमाम !!!! प्रभु (बचाओ बचाओ प्रभु)
ईश्वर – अब किस बात की त्राहि ????   इंद्र किससे बचाऊ और जब तुम्हारी त्राहि त्राहि होती है तब ही तुम्हे मैं याद आता हूँ वर्ना तो गलती से भी इधर नहीं आते तुम ....आजकल तो सभी राक्षस शांत बैठे है ...कोई तुम्हारे सिंहासन को हथियाने में भी interested नहीं है ,फिर अब काहे का त्राहिमाम.. ?? “
इंद्र (कुटिल मुस्कान के साथ उत्तर देते है )- “ संसार के 80% people को आप त्राहि के समय ही याद आते हे भगवन्... मैं  भी majority को follow  करता हूँ ...”
ईश्वर(इंद्र की चालाकी पर मंद मंद मुस्कुराते हुए)- “चलो शुरू हो जाओ ....”
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इंद्र –“त्राहिमाम प्रभु ! त्राहिमाम फ्रॉम बाहुबली एंड बाहुबली fame प्रभास ..... इसने एक बाहुबली बन कर आफत मचा रक्खी है ....स्वर्ग की सारी अप्सराये उसके पीछे मोहित हो कर पृथ्वी ग्रह पर चली गयी है ,सभी देवगण भी उसकी मूवी देखने चले गये है ....स्वर्ग में स्वर्ग बनाने वाली अप्सराये ही नही तो किस बात का स्वर्ग और कैसा सिंहासन ,ले दे कर एक यही अप्सरा बची थी सो अब ये भी जाना चाहती है |हे प्रभु इस बाहुबली नामक मानव ने तो पृथ्वी पे बैठे बैठे मेरा सिंहासन हिला दिया .. त्राहिमाम प्रभु त्राहिमाम ...”
अप्सरा – “त्राहिमाम me too ..प्रभु .... मुझे भी वंहा जाने दिया जाए ..सभी अप्सरा डार्लिंग को शादी का प्रपोजल भेज रही है मैं यंही रह गयी तो मेरा candidature ख़त्म हो जाएगा “

apsara for bahubali
इंद्र – “देवी!!! ईश्वर के सामने थोड़ी लाज करो उस मानवको डार्लिंग कह कर  पुकार रही हो ... और तुम चली जाओगी तो हमारा मनोरंजन कौन करेगा ??”
अप्सरा ( क्रोधवश )-“हे इंद्र देव !!!क्या श्रृष्टि के अंत तक आप मनोरंजन करेंगे प्राचीन काल से हम आपको नृत्य दिखाते आ रहे है पर आप को आजतक एक स्टेप भी नहीं आया ...अब जब कुछ नहीं आ रहा तो .. भजन कीर्तन करो कुछ दुर्बुद्धि कम होगी ..और आपकी जानकारी के लिए डार्लिंग प्रभास का nickname है (मन ही मन...... हालांकि वो ही रियल डार्लिंग है )|”

prabhas- as bahubali in divine count
ईश्वर (मुस्कुराते हुए) – “पुत्री बाहुबली के सारे shows हाउसफुल चल रहे है .. तुम चाहो तो तुम्हारे लिए special screening यंही करवा दूँ...”
अप्सरा – “भगवन , मैं पृथ्वी पर ही जाना चाहती हूँ , मुझे आज्ञा दें ...”
ईश्वर – “प्रस्थान करें देवी ..हमारा भी एक काम कर देना ...लक्ष्मी देवी वंहा प्रभास के घर में मिलेंगी उनसे बोलना की उनके बिना बैकुंठ सूना है अगर प्रभास पर पूरी ममता बरसा चुकी हो तो बैकुंठ वाले को भी दर्शन दें ...”
इंद्र (आश्चर्य से)- “क्या माते भी वंही है .....” (मन ही मन विचार करते हुए लगता है कोई षड़यंत्र वंहा करना पड़ेगा कंही स्वर्ग का वैभव भी माता उसी को ना दे आये )
laxmi in prabhas home
हनुमान जी – बाहुबली की blockbuster कमाई से पता नहीं चल रहा की माते स्वयं वंहा विराजी है ...इंद्र जी किसी षड़यंत्र का मत सोचना माँ लक्ष्मी के साथ माँ पारवती माँ सरस्वती भी वन्ही है और किसी ने क्रोधवश दुर्गा रूप धर लिया तो तुम तो गए ...


नोट –धन्यवाद ... इसके आगे के भाग को पढना चाहे तो कृपया बताये  ...
count laughing god

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