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साँसों का दैवीय संबंध

एक ऐसा ईश्वरीय प्रेम जो हमारे संस्कार नहीं देखता | ये नही देखता की हमने कंहा कंहा कितना दान दिया है, जो ये भी नहीं ध्यान  नहीं  देता कि हमने अच्छे कर्म किये है कि बुरे ..उसे कोई फर्क नही पड़ता | उसे इससे भी फर्क नही पड़ता कि हमने कितनी बार प्रार्थना करी है | कोई व्रत किया है अथवा नही, कोई पूजा उपवास किया है के नहीं..

आइये आपका परिचय करवाते है ईश्वरीय प्रेम के एक अनोखे रूप से ....ऐसा रूप जिस पर हमारा ध्यान बहुत कम जाता है जैसा कि पिछली पोस्ट में भी बताया गया है ईश्वरीय प्रेम  हमेशा ही साथ रहता है | यंहा पर चर्चा करते है उस साधन की जिसके द्वारा यह दैवीय प्रेम हमारे अन्दर हर पल  समाहित होता  रहता  है |
बात करते है साँसों की ....
 नहीं ! यहां इड़ा पिंगला और सुषुम्ना की बात नहीं होने वाली |  बात होने वाली है और भी आसान.... बात होने वाली है हमारी साधारण सी सांसो की...
ब्रह्मांड की शक्ति को हम कई तरीके से ग्रहण करते हैं जैसे कि नींद की अवस्था में , ध्यान की अवस्था में, पूजा पाठ की अवस्था में, और योग करने पर ...लेकिन इन सब में सांसों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि ऐसा संभव है हम ध्यान ना करें पूजा पाठ ना करें योग ना करें यहां तक कि ऐसा भी संभव है कि किसी कारणवश हमें नींद ना आये | लेकिन हमारे  जीवित रहते यह संभव नहीं है कि हम सांसे ना ले |
        बात होने वाली है " सांसो की शक्ति (power of breathing) क्या होती है ? "
सांसे रोक कर देख लीजिए.... अभी समझ में आ जाएगा |
लेकिन क्या सांसों की शक्ति इतनी ही होती है ! हमें जीवित रखने भर की ??????....
साधारण रूप में ऑक्सीजन  हमारे शरीर के अंदर inhale होती है,  सांस भरते समय ,जो की भौतिक शरीर को चलाने के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है | यह शरीर के लिए fuel का काम करती है , और कार्बन डाइऑक्साइड जोकि एक waste product है हमारा शरीर उसे बाहर करता है |
क्या यह सिर्फ संसारिक स्तर तक सीमित है ?????.....
 आध्यात्मिक स्तर पर सांसों का उत्तरदायित्व (accountability) और भी बढ़ जाता है हम सांसे भरते समय ब्रम्हांड की ऊर्जा के कुछ अंश को भी अपने अंदर inhale करते हैं और बाहर नकारात्मक ऊर्जा (waste energies or negative energies) को बाहर  exhale  करते हैं |
हमारी साँसे  हमारे शरीर के ऊर्जा मंडल को साफ रखने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है बस हम कभी इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं ...” ब्रम्हांड की शक्ति भी सांसों के माध्यम से हमारे शरीर के अंदर जा रही हैं |”
इसे एक उदाहरण से समझते हैं...
1.   जब आप किसी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करते हैं.... एक गहरी सांस लेते है | उस समय ऑक्सीजन के साथ अंदर जाती है वह दैवीय शक्ति - जो आपको यह प्रेरणा देती है कि होने वाले संघर्ष का सफलतापूर्वक सामना करें |

2.   मान लीजिए, आपको कोई महत्वपूर्ण (important task) पूरा करना है और आपके पास लिमिटेड टाइम है जो कि खत्म होने वाला है .... आप अपनी पूरी शक्ति पूरे ऊर्जा से इस कार्य में लगे हुए हैं और आपने इसे पूरा कर लिया इस के तुरंत बाद आप क्या करते हैं पानी पीते हैं या खुशी से उत्सव मनाते है ? नहीं सबसे पहले आप एक गहरी सांस लेते हैं और गहरी सांस के साथ अनजाने में आप अपने अंदर प्रवेश कराते हैं ब्रह्मांड शक्ति को \ ब्रह्मांड की ऊर्जा को \कॉस्मिक एनर्जी को जो आपके शरीर में , आपके मन में खुशी संतुष्टि और आत्मविश्वास के एहसास को अपने साथ अंदर लेकर आती है और आपको ऐसा महसूस होता है कि आपने सक्सेसफुल तरीके से टारगेट को अचीव कर लिया |
तो क्या यह ब्रम्हांडीय ऊर्जा छोटे-मोटे कार्यों मे साथ देती है....
यह आपके जीवन के हर स्तर पर आपके साथ रहती है जो भी इस सृष्टि में है... यह ऊर्जा हर उस चैतन्यता के साथ रहती है यह उर्जा छोटी चीजों और बड़ी चीजों में अंतर नहीं करती है | भेदभाव नहीं करती है | यह ईश्वरी शक्ति जात पात धर्म और जंतुओं के जितने भी वर्गीकरण है उनके भी परे है जितनी हमारे साथ रहती है उतनी एक चींटी के साथ भी रहती है | यह ऊर्जा हमारे चक्रों में समाहित शक्ति के लिए ईधन का कार्य करती है ठीक उसी तरीके से जिस तरीके से ऑक्सीजन हमारे शरीर में ईधन का कार्य करता है |
 लेकिन यह एक कल्पना भी हो सकती है या यह मन का ख्याली पुलाव भी हो सकता है ..
आइए एक प्रयोग द्वारा यह समझे  ...
आराम से बैठ जाइए और इस छोटे-से प्रयोग को बड़ी आसानी से करिए ...
आपको करना क्या है....
अपने मन में यह इच्छा करें आप ब्रह्मांड की ऊर्जा को महसूस करना चाहते हैं ....
आराम से गहरी सांसे भरें और छोड़ें और साथ साथ मन-ही-मन 10 से 1 तक उल्टी संख्या के साथ गहरी साँसे भरें और छोड़े...  आप हर घटती संख्या के साथ आप और भी अधिक शांति से भरते चले जाएंगे जब तक आप 1 पर आएंगे आपका चित्त एकदम शांत हो चुका होगा |
    अब जरा इस बात पर ध्यान दें कि गहरी सांसे लेते हुए अगर हम सिर्फ ऑक्सीजन को अन्दर  कर रहे थे तो ऑक्सीजन का काम आप को शांत करना नहीं है science में ऑक्सीजन की ऐसी कोई प्रॉपर्टी नहीं बताई है जो यह prove करे कि यह मन को शांत करती है | तो ऐसी क्या चीज है ऐसा क्या अंदर गया जो आप शांति महसूस करने लगे ?...
.....जी हां यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा है | यह उस परम परम परमात्मा की अनंत शक्तियों में से छोटा सा अंश है जो आपके भीतर गया | जिसे मात्र 10 बार लेने से ही आपका विचारों में फुदकता  उछलता-कूदता मन चुपचाप एक जगह बैठ गया | अजीब सी बात है.... छोटी सी बात है..... जिस पर हमारा ध्यान नहीं जाता ब्रम्हांड की शक्ति...... जो अंदर गई... ईश्वर का वह प्रेम... जो इतनी आसान तरीके से घटता है कि हमारा ध्यान नहीं जाता यह है ... प्रकृति की वह शक्ति जो आपका ख्याल रख रही होती है |
 हमारी हर एक सांसों को वह परमात्मा अपने प्रेम से अपनी शक्तियों से सजाकर भेजता है |
यह ब्रम्हांड की शक्ति वास्तविकता में आपके शरीर को स्वस्थ रखती है चाहे हमें पता हो या ना हो लेकिन यह शक्ति हमारे शरीर को संचालित करती है | चाहे हमारी जानकारी में हो या ना हो पर ऐसा होता है | ब्रह्मांडीय शक्ति यदि शरीर में कम मात्रा में प्रवेश करें या शरीर में  कम हो जाए तो हम बीमार पड़ जाते हैं और अगर खत्म हो जाए तो हम अपने शरीर को त्याग देते हैं | ब्रम्हांड की शक्ति का शरीर में अधिक प्रवेश करना मतलब अधिक स्वस्थ मन अधिक स्वस्थ शरीर 
    और इसीलिए बनाया गया प्राणायाम या कुछ ऐसे कहें इसीलिए प्राणायाम की विधियां बनाई गई ताकि हम अधिक से अधिक ब्रह्मांडीय शक्ति को ग्रहण कर सके | प्राणायाम , हमारे अंदर ब्रम्हांडीय ऊर्जा को ग्रहण करने की क्षमता को बढ़ाता है और ब्रह्मांड की ऊर्जा को अत्यधिक अंदर शरीर के अंदर लाता है जब भी हम किसी योग्य आचार्य से प्राणायाम सीखते हैं तो वह  प्राणायाम करते समय साथ में वह यह भी बताते चलते  है कि आप ऐसे विचार करें “ ब्रह्मांड की शक्तियां हमारे अंदर आ रही है ...मान लीजिए कि ईश्वरी शक्ति दैवीय प्रेम हमारे अंदर आ रहा है वास्तव में यह कल्पना नहीं हकीकत है लेकिन हम अपना सारा ध्यान प्राणायाम के तरीकों के लगा देते हैं
| उसके पीछे इन सांसों के सिवाय  कौन सी घटना साथ-साथ घट रही है हम इस पर ध्यान नहीं देते हैं | अलग अलग  प्राणायाम शरीर के विभिन्न अंगों को और जीवन के विभिन्न तत्वों पर असर डालते है |
 हिन्दू धर्मं में किसी भी पूजा पाठ या धार्मिक अनुष्ठान से पहले प्राणायाम के प्रयोग को बताया गया है सामान्य जन मानस में इसे प्रयोग नहीं करवाया जाता जबकि यह महत्वपूर्ण चरण है ( आप गीताप्रेस गोरखपुर की सामान्य पूजा विधान में इस चरण के बारे में जान सकते है | ) किसी अनुष्ठान से पहले इस चरण को इसलिए किया जाता है ताकि जब आप दैवीय शक्तियों का आवाहन करे तो आपका शरीर और मन उनकी ऊर्जा को सह सके |
     
   इस ब्रम्हांड की शक्ति को हम सांसों के माध्यम से अपने शरीर के किसी भी अंग में भेज सकते हैं | अपने किसी भी विचारों में भी सकते हैं और उन विचारों को शक्तिशाली बना सकते हैं |

सांसों के माध्यम से इस शक्ति को हम दूसरों को भी भेज सकते हैं चाहे वह हमसे कितनी ही  दूर बैठा क्यों ना हो |


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