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अपनी आत्म-शक्तियों को जागृत करने के साधन "our spiritual resources"

कुछ शब्द है “टेक्नोसेवी, what’s app , फेसबुक-ट्विटर, साइबर कैफे, chrome ,वीडियो कॉलिंग, जिओ सिम, sms , ये ऐसे शब्द हैं जिनसे  हम परिचित हैं.. हमारे बच्चे परिचित हैं.. पर क्या हम इस बात से निश्चित है कि इन शब्दों से हमारे दादा परदादा भी परिचित होंगे ? हमें यह पता है कि हमारे आगे आने वाली पीढ़ीयाँ इन शब्दों से परिचित होगी बल्कि और भी कई ऐसे नए शब्द आएंगे जिन्हें वो समझेगी पर हम नहीं समझेंगे |

अब कुछ और शब्दो को लेते हैं...इन शब्दों की तरफ ध्यान दें... कठिन परिश्रम, निर्णय क्षमता या संकल्प शक्ति shakti, प्रेम, सहायता, क्षमा, कृतज्ञता...और एक शब्द साँसे (breathings).. क्या आप इन शब्दों से परिचित हैं ? जी हां बिलकुल.. इन शब्दों से हमारे बच्चे भी परिचित हैं | हमें इनके बारे में किसी ने बैठकर बताया नहीं | किसी ने बैठकर इन शब्दों को.. इनका क्या मतलब होता है ? समझाया नहीं... आप ही बताइए आप ने अपने किस बच्चे को “ सहायता करना किसे कहते हैं यह बताया हो या प्रेम करना किसे कहते हैं यह बताया हो ” ऐसे ही  क्षमा करना किसे कहते हैं यह बताया हो ? उसे ऑटोमेटिकली पता चलता है... पता चलता है किताबों से... पता चलता है अपने आसपास के वातावरण से..यें ऐसे शब्द है जो घूम-फिर के हर किसी की लाइफ में आते जाते रहते हैं | कुछ रिमाइंड कराते रहते हैं |

अब इस बात पर ध्यान दीजिए कि ऐसा क्यों होता है कि कुछ ऐसे शब्द होते हैं जो हमारे जीवन में रहते हैं | हमारे जीवन के आस पास रहते हैं |ऐसे शब्द है जो हमारे पास भी है हमारे पूर्वजो के पास भी है हमारे आगे आने वाली पीढियों के पास भी रहेंगे | जबकि कुछ थोड़े समय बाद अपने आप मिट जाते हैं उनकी कोई जरूरत नहीं रह जाती जैसे एक चीज या शब्द है चिट्ठी यह क्या हमारे आने वाली पीढ़ियों को याद रहेंगी ? नहीं... आने वाले समय में हमें बताना पड़ेगा कि चिट्ठी लिखना जैसी भी कोई चीज होती थी लेकिन हमें उंहें यह नहीं बताना पड़ेगा कि दया करना क्या चीज होती ? क्षमा करना क्या चीज होती है ? क्यों ऐसा होता है ?
क्यों हर धर्म में हमें क्षमा दया प्रेम कृतज्ञता मिल जाते हैं ? क्यों हर साधु संत फकीर इन शब्दों के बारे में बात करता है ? क्यों ईश्वर के विभिन्न अवतार हमें इन शब्दों के बारे में याद दिलाते हैं ? ऐसा क्या है इनमें ? क्यों रामचरितमानस में रावण को मारने से पहले राम ने उसे बार-बार क्षमा करने का प्रयास किया ? क्यों बुद्ध (buddha) का सारा जीवन अहिंसा पर ही आधारित रहा
और क्यों इन शब्दों से हमें अपनापन लगता है ...? लगाव लगता है ...क्यों हिंसा से हमारे जी घबराता है और अहिंसा में शांति मिलती है ? क्यों हमारे घर का कोई सदस्य अगर किसी के सहायता कर देता है तो हमें आंतरिक खुशी होती है ?
वास्तव में यह शब्द ...शक्तियों के वह बीज हैं जिनका उपयोग हम अपनी शारीरिक और मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने में कर सकते हैं | इसके बारे में हमें बार-बार बताया जाता है | हर दिव्य शक्ति अपने अवतार में... हर धार्मिक कहानी में... इन शब्दों का उपयोग होता है यह हमें याद दिलाता है कि हमारे पास यह जो शब्द हैं यह वास्तव में बीज है उन शक्तियों के... जिनसे हम अपनी आत्मिक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं | यें वो कड़ियाँ हैं जिनको जोड़ जोड़ कर हम ईश्वर के पास पहुंच सकते हैं | ये इतने सरल शब्द होते इतनी easy तरीके से हमारे आस-पास उपलब्ध है कि हमारे ध्यान में ही नहीं आते यह हमारे पास इतनी अत्यधिक मात्रा में उपलब्ध है कि हम इनके मूल्यों को ही नहीं समझते इनकी अहमियत ही नहीं समझते |
प्रश्न होगा अच्छा ...प्रेम , दया , सहायता .. अरे हमने बड़ी करी है | हमने बड़ा माफ़ किया है दूसरो को | हमे कंहा भगवान् मिला ? उत्तर है ये सब खुद से कितना किया ? खुद से कितना प्रेम किया है ? खुद को कितना माफ़ किया है ? एकदम शांत बैठ जाइये खुद में डूबिये और खुद से पूछिए की मैंने क्या क्या  गलती करी है | मुझे खुद को कौन कौन सी जगह खुद को माफ़ करना है आपका मन आपको पूरी लिस्ट थमा देगा और ये सेकंड में होगा | दूसरो को भूल जाइये | जब तक आपके घर में अनाज ना हो आप किसी को दान नहीं दे सकते इसी तरह जब तक खुद में ये सब नहीं होंगे आप वास्तव में किसी और को ये दे नहीं पाएंगे |     
अगर आप इन चीजों को अपने अंदर समाहित करते हैं तो आप जैसे जैसे आत्म चेतना की तरफ बढ़ेंगे दिव्य शक्तियों से संपर्क करने बढ़ेगा |
          जैसे ही हम यह भावना करते हैं कि हमें दैवीय  शक्तियों से बात करनी है या दिव्य आत्माओं से बात करनी है | दिव्य शक्तियों को यह बात पता चल जाती है कि हम उनसे संपर्क साधना चाहते हैं और जितना हम उनसे बात करने के लिए आतुर रहते है उससे भी ज्यादा वो हमसे संपर्क साधने की ईक्छा रखती है | इसलिए  जैसे जैसे हमारे शरीर और मस्तिष्क की शक्तियां बढती है.. ऊर्जा का स्तर बढ़ता जाता है... दिव्य शक्तियां  उसी अनुपात  में स्वयं को हमारे सामने प्रकट करने लगती हैं |
     यंहा पर एक बात और जानने की है .. हम , मस्तिष्क को मुख्यतः दो भागो में बाँटते है .. चेतन मन और अवचेतन मन( conscious mind & subconscious mind ) | हमारा अवचेतन मन हमेशा ही इन दिव्य शक्तियों के संपर्क में रहता है पर हम अपने जीवन को चेतन मन के अनुसार जीते है और पारलौकिक अनुभव करने के लिए हमे दोनों मस्तिष्क के भागो में सही ताल मेल बैठाने की ज़रुरत होती है |
हम क्या क्या उपाय कर सकते है ? उत्तर है ....
ü शारीरिक ऊर्जा बढानी है |
ü मानसिक ऊर्जा बढानी है |
ü आध्यात्मिक ऊर्जा (spiritual energy) खुद बी खुद बढ़ जाएगी अगर आप उपरोक्त दोनों ऊर्ज़ाओ को  बढाते है |
ईश्वरीय शक्ति ,ईश्वर सत्य से संपर्क करने के लिए इन तीनों शक्तियों को बढ़ाना आवश्यक है |
आइए देखते हैं कि हम अपनी ऊर्जा के स्तर को अपनी आत्मशक्ति को कितना बढ़ा सकते हैं और कैसे बढ़ा सकते हैं ? अपनी हर अवतार में ईश्वर ने मनुष्य को बार-बार अपनी आत्मिक शक्तियों को बढ़ाने के उपाय बताए हैं विभिन्न धर्म ग्रंथों में भी इस के उपाय बताए गए हैं आइए सरल भाषा में देखे कि कौन-कौन से उपाय है ?

बात कर लेते हैं उनकी जो इनको बढ़ाने के लिए हमारे पास उपलब्ध हैं...
Ø हमारी सांसे (breathings)
Ø हमारी भावनाओं की शक्ति (power of feelings)
Ø हमारी निर्णय शक्ति (willpower)
Ø हमारे अवचेतन मन की शक्ति  (power of your sub conscious mind)
Ø प्रेम की शक्ति (power of love)
Ø दया की शक्ति (power of kindness)
Ø सहायता की शक्ति (power of help)
Ø कृतज्ञता की शक्ति (power of gratitude)
Ø  कठिन परिश्रम करने की शक्ति (power of hard work)
Ø क्षमा शक्ति (power of forgiveness)
Ø ध्यान शक्ति (power of the meditation)
Ø मंत्र शक्ति (power of mantra)
Ø तंत्र शक्ति (power of tantra)
Ø यंत्र शक्ति (power of yantra)
Ø अपने चक्रों की ऊर्जा को बैलेंस करने की हमारी क्षमता  
Ø आध्यात्मिक स्तर पर हमारी आध्यात्मिक स्तर पर स्वयं में सुधार लाने की हमारी क्षमता
Ø भक्ति मार्ग
Ø हमारे आस-पास उपलब्ध किताबें (power of books)
Ø ऊर्जा चिकित्सा अथवा हीलिंग ( healing )
Ø योग मुद्रा की शक्ति (power of yoga mudra)
बड़ी सुविधाएं दी हुई है भगवान् ने हमारे लिए बड़ी आसन सी हमारे पहुँच के अन्दर वाली ....हम एक एक करके इन सभी पर बात करेंगे ....


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