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ईश्वर एवं उनकी शक्तियां – भाग २


आपको मिली हुई शक्तियां जिन्हें हम ऊर्जा भी कहते है आपको अचंभित करने के लिए काफी है ,फिर भी इनकी मात्रा दैवीय शक्तियों की तुलना में जरा सी ही है |हालाँकि यदि ये शक्तियां आपमें जग जाये तो आपको हर प्रकार  की सुख सुविधा प्रदान करने को काफी है | जितनी भी शक्तियां ईश्वर से आपको मिली है यदि उनमे से कुछ ही जग जाये तो आपके कई काम बना सकती है |



एक प्रश्न यह है की ये शक्तियां हमें दी क्यों  गयी हैं ?

इस प्रश्न का उत्तर एक उदाहरण से समझते है , मान ले आपका बच्चा स्कूल जाने लायक हो गया है आप शहर का सबसे अच्छा  स्कूल अपने सामर्थ्यानुसार उसके लिए चुनते है और यही चाहते है की जिस भी क्लास तक वह स्कूल है बच्चा उस क्लास तक पूरी पढाई करे ,मान ले आखिरी क्लास 12वीं है तो आप यही अपेक्षा  करेंगे कि, बच्चा 12वीं तक पूरी पढाई करे ,और उसके बाद ही वह स्कूल छोड़े | जैसे बच्चा स्कूल में आपके सामर्थ्यानुसार प्रवेश करता है वैसे ही आत्मा किसी ग्रह  पर अपने संस्कार के अनुसार आती है ,जैसे हमारी चेतना पृथ्वी पर आई है | और हम यहाँ  पर तब तक रहेंगे जब तक हम यहाँ  पर उपलब्ध आखिरी क्लास ना पास कर ले |
यहाँ  की प्रिंसिपल और टीचर प्रकृति है ,जीवन की परिस्थितियां ,किताबो के पाठ अथवा लेसन जैसी है और उन परिस्थितियों से निकलना जैसे पाठ के आखिरी में दिये  गए प्रश्नों के उत्तर को देने जैसा है ,और अब सुखद बात यह है की जैसे बच्चे को स्कूल जाने पर माता पिता स्कूल बैग ,कॉपी किताब , पेन पेनसिल दिलाते  है ,हमे क्या   मिला  होगा ? आपको लगेगा कि खाली हाथ आये थे खाली हाथ जायेगें तो आप बिलकुल गलत है , ईश्वर ने  ,उस परम चेतना  ने ,हमें  यूँ हि नहि भेजा हमे अपनी शक्तियों से लैस करके भेजा है | हमें हर तरीके की समस्याओं का सामना करने के उचित रूप से शक्तियां मिली हुई है | इसके साथ ही दैवीय सहायता हमारे आस पास हर समय उपलब्ध रहती है | हर एक पलको उपलब्ध रहती है |

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