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Showing posts from December, 2016

अपनी आत्म-शक्तियों को जागृत करने के साधन "our spiritual resources"

कुछ शब्द है…“टेक्नोसेवी,what’s app , फेसबुक-ट्विटर, साइबर कैफे,chrome ,वीडियो कॉलिंग, जिओ सिम, sms”, ये ऐसे शब्द हैं जिनसे हम परिचित हैं.. हमारे बच्चे परिचित हैं.. पर क्या हम इस बात से निश्चित है कि इन शब्दों से हमारे दादा परदादा भी परिचित होंगे ? हमें यह पता है कि हमारे आगे आनेवाली पीढ़ीयाँ इन शब्दों से परिचित होगी बल्कि और भी कई ऐसे नए शब्द आएंगे जिन्हें वो समझेगी पर हम नहीं समझेंगे |

अब कुछ और शब्दो को लेते हैं...इन शब्दों की तरफ ध्यान दें... “कठिन परिश्रम, निर्णय क्षमता या संकल्प शक्ति shakti, प्रेम, सहायता, क्षमा, कृतज्ञता...और एक शब्द साँसे (breathings).. क्या आप इन शब्दों से परिचित हैं ? जी हां बिलकुल.. इन शब्दों से हमारे बच्चे भी परिचित हैं | हमें इनके बारे में किसी ने बैठकर बताया नहीं | किसी ने बैठकर इन शब्दों को.. इनका क्या मतलब होता है ? समझाया नहीं... आप ही बताइए आप ने अपने किस बच्चे को “ सहायता करना किसे कहते हैं यह बताया हो या प्रेम करना किसे कहते हैं यह बताया हो ” ऐसे ही  क्षमा करना किसे कहते हैं यह बताया हो ? उसे ऑटोमेटिकली पता चलता है... पता चलता है किताबों से... पता…

जानिए कैसे करे सम्पर्क दैवीय शक्तियो से

बात करते हैं दिव्य शक्तियों से संपर्क कैसे बढ़ाएं? दिव्य शक्तियां , देवी देवताओं से बातचीत, उनके निर्देशों  को समझना ,उन्हें  महसूस करना.... लगभग हर इंसान की इच्छा होती है |
हर कोई बहुत अंदरुनी तौर पर यह जानना चाहता है कि वास्तव में शक्ति है या नहीं ???.... इन का आभास कैसे करें ?  जब वह किसी सिद्ध को देखता है, किसी अच्छे साधु महात्मा को देखता है ,फकीर को देखता है ...तब उसके दिमाग में हमेशा यह बात आती है कि अगर ये लोग  ईश्वर को महसूस कर पा रहे हैं तो हम ईश्वर को क्यों नहीं महसूस कर पाते ? अगर यह ईश्वरीय प्रेम को इतना महसूस करते हैं तो हम क्यों नहीं इसे फील कर पाते ? आइए इसी पर बात करते हैं......... ईश्वरी ऊर्जा अथवा दैवीय शक्तियां हमारे शरीर की ऊर्जा अथवा शक्तियों  से कहीं ज्यादा प्रबल होती है | यह ऊर्जा चाहे  देवी देवता के रूप में रहे ,दिव्य शक्तियों के रूप में रहे या  गुरु के रूप में रहे ..यह ऊर्जा हमारे शरीर की ऊर्जा से हमेशा ही ज्यादा रहती है |

लेकिन अपने आत्मिक शक्तियों को हमे बहुर कम कर के भी नही आंकना चाहिये | ईश्वरीय  चेतना के अंश होने के कारण, हमारे अन्दर भी शक्तियों का भण्ड…

उसका प्रेम हर एक पल हमारा ख्याल रखता है .....

क्या ऐसे एहसास आपको होते है....... 1.आपके पास कोई समस्या है समाधान के रूप में दो विकल्प हैं .......एक समाधान ऐसा है जिसे आपका मन  तोते की तरह दोहरा रहा होता है | दूसरा ऐसा है जिसे कोई एक बार शांति से कहता है और चुप हो जाता है |  क्या कभी ऐसा हुआ है ?.......और अगर आप मान लीजिए पहले  सलूशन को फॉलो करते हैं  और वह गलत निकल जाता है जबकि दूसरा जो ऑप्शन आपके दिमाग में आया था आप कहते हैं अरे  यह बात मेरे दिमाग में आई थी !         जी हां.... आई तो आपके दिमाग में ही थी!!..... पर कैसे आई थी कभी इस पर बात पर भी ध्यान दें | एकदम शांति से आई थी ...क्या किसी ने  आकर कुछ कह दिया था ? ...ऐसा लगा था कि कोई आया और आपसे कुछ कह कर चला गया !!!!!! 2.आप किसी मुसीबत में पड़ने वाले हो और ऐसा महसूस हुआ हो जैसे किसी ने आदेश दिया हो यह करो ! और जैसे ही अपने बस.... किया हो आप बच गए हो | क्या उसके बाद कभी सोचा कौन  था किसने बचाया ? 3.आप गहरी चिंता में गाड़ी चला रहे हो | आपके एक्सीडेंट होने से पहले आपका सारा ध्यान .... सारा ध्यान... वर्तमान में आ गया हो | हाथों से अपने आप गाड़ी की स्टेयरिंग  मुड गयी  हो और आप बच गए …

अपने रिश्तो को लेकर अच्छा महसूस करें

बात करते हैं  उन् आत्माओं की जो आपकी सहायता करने के लिए जीवन धारण करती है और उन् आत्माओं की जो सूक्छ्म रूम से आपके साथ रहती है आपकी सहायता के लियें |                 अब ज़रा इस बात को ध्यान से पढने और समझने की कोशिश करिएगा | क्योकिं यह भाग थोड़ा कठिन हो जाता है | वास्तव में शरीर धारण करने से पहले ही हम ये निश्चित कर लेते है की इस जीवन में मुझे अपनी कौन सी शक्ति को जागृत करना है ,कैसे करना है ? कौन कौन सी वो आत्माएं है जिनके मेरे सामान ही उद्देश्य है ? उनसे मुझे जीवन  के किन रास्तो पे मिलाना है | ऐसे कौन से घटनाचक्र है जो किसी खास उद्देश्य की  पूर्ती के लिए ज़रूरी है ? ऐसा देखा गया है कि एकसमान उद्देश्यों के पूर्ती के लिए कई आत्माएं एक परिवार का रूप लेती है | या फिर यदि किसी आत्मा को कोई खास उद्देश्य पूरा करना होता है तो उसके सहायता के लिए दूसरी आत्मा उसके मित्र या शत्रु के रूप में भी जन्म लेती है | दूसरी आत्माओ से ऐसा करने के लिए हम ही कहते है वो हमारे उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमारी जन्म से पहले या जन्म के बाद या या फिर जन्म के साथ ही जन्म लेती है जैसे हमारे माता पिता के रूप में भाई …

प्रकृति की शक्तियां और हम

जब कोई समस्या हमारे सामने खड़ी होती है|  कुछ उससे  तत्काल हार मान सकते हैं और  कुछ उसके समाधान को खोजने में लग जाते हैं | कुछ उसे एक अवसर की तरह लेते हैं और कुछ उसे भगवान भरोसे छोड़ देते हैं | याद रखिए हर समस्या भगवान भरोसे छोड़ने लायक नहीं है | क्योंकि अगर आप आज इन समस्याओं को भगवान भरोसे छोड़ेंगे तो आपको कल भी इसी समस्या से दो चार होना पड़ेगा यहां तक कि अगले जन्म में भी इसी समस्या से दो चार होना पड़ सकता है यह समस्या आपकी उन्नति के लिए या आपकी क्षमता को बढ़ाने के लिए ही आपके सामने दी जा रही है और अपनी उन्नति और अपनी क्षमता को बढ़ाना हर आत्मा का उद्देश्य होता है |
जैसा की हम पहले ही देख चुके हैं कि हमारे पीछे पूरी दैवीय आर्मी रहती है तो अब सोच लीजिए कि समस्या वाकई में क्या बड़ी होती है वास्तव में समस्या के प्रति हमारा नजरिया ही समस्या को बड़ा या छोटा बनाता है जब हम छोटे रहते हैं और कोई  खिलौना चाहिए होता है तो उस समय हमारे जीवन में सबसे बड़ी समस्या खिलौने को प्राप्त करना ही होता है क्योंकि आयु में हमारे लिए वही समस्या सबसे बड़ी होती है जब हम बड़े होते हैं तो जो समस्या हमारे सामने आती …

भाग २ -- कुछ दिक्कत हो तो याद कर लेना तुम्हारे पीछे स्वयं मैं हूँ .......

पिछले पोस्ट  में हमने यह देखा कि ईश्वर किन-किन रूपों में और किन-किन शक्तियों के साथ हमारे पास  रहते हैं और हमने  यह जान लिया कि हम किसी भी परिस्थिति में अकेले नहीं होते हैं , चाहे सुख हो अथवा दुख हम कभी भी दैवीय शक्तियों के बगैर नहीं रहते हैं |
दैवीय सत्ता को अपने आस-पास महसूस करना बहुत ही सुखद अनुभव होता है | आप जानते हो कि आपके पास कोई है जो आपके सुख को भी जानता है ,आपके दुख को भी जानता है | आप जानते हो कि कोई है जो हर परिस्थिति में , हर हालत में आपका भला ही चाहता है | आप जानते हो कि कोई है जो हर कीमत में आप के पक्ष में है , आपके  साइड में है | कोई है -- जो बहुत ही आंतरिक स्तर पर यह जानता है कि अगर आपने कुछ किया है तो वह क्यों किया है ? किस मजबूरी में किया है ? और आपको वास्तव में कैसा महसूस हो रहा है ? आखिर ऐसे ही हमारे विद्वानों ने यह थोड़ी ना कहा है , “ भगवान हर पल की खबर रखते हैं | “ कुछ तो वजह होगी !  उन्होंने कुछ तो चिंतन किया होगा और यही वास्तविक वजह  है | अगर आप अपने बच्चे को डांटकर पश्चाताप कर रहे हैं तो कोई है जिसे यह  सबसे पहले पता चलता है कि आप पछता  रहे हैं यदि आप पश्चाताप …

कुछ दिक्कत हो तो याद कर लेना तुम्हारे पीछे स्वयं मैं हूँ .......

कल्पना कीजिये कि आपको कैसा लगेगा अगर आपके पीछे आपके शहर का कमिश्नर हो ,आपकी हर तरह से सहायता के लिए ? अच्छा लगेगा ,गर्व महसूस होगा या डर लगेगा , दुःख होगा ,महसूस करके बताइये कैसा लगेगा  और अब मान लीजियेअगर आपके पीछे आपकी सहायता करने के लिए देश के राष्ट्रपति खड़े हो ? अब कैसा लगेगा ? कुछ ज्यादा ही हो गया ना ! चलिए कल्पना लोक से बाहर निकल कर हमारी दुनिया में कदम रखते है | आइये अब देखते है कि आध्यात्मिक रूप से हमारे पीछे कोई है भी या नहीं !   हमारे पास और हमारे साथ क्या है और कौन है ? ...... Øप्रकृति की स्वयं की शक्ति Øजो शक्तियां हमारे अन्दर  ,हमारे  चक्रों में समाई है उसका वृहत (बड़ा ) रूप जो की ब्रह्माण्ड में फैला है | Øदेवी देवता की शक्ति( हिन्दू  धर्मं में कहा गया है कि हमारे ३३ करोड़ देवी देवता है वास्तव में ३३ करोड़ तरह की तीव्र ऊर्जाएं है जो हमारा ध्यान रखने के लियें है आप  यकीन नही करेंगे पर हमारे ऋषि मुनियों ने ऊर्जा विज्ञान पर बहुत काम किया है | ) Øहमारे  साथ रहने वाली दिव्य आत्माएं Øहमारी  सहायता करने वाली वह आत्माएं जो सूक्ष्म रूप (astr…

ईश्वर द्वारा हर तरह से हमारा कल्याण

ईश्वर द्वारा बनाई हुई सभी उर्जाऐं ,  हमारे कल्याण के लिए है | फिर वो

नकारात्मक ऊर्जा ही क्यों ना हो | नकारात्मक ऊर्जा का जीवन में आना सृष्टि द्वारा सीधा सन्देश होता है , कि हमारी शक्तियों को जागृत करने का समय आ गया है अथवा वो कमजोर पड़ रही है | नकारात्मक ऊर्जा एक उत्प्रेरक की तरह कार्य करती है | आप खुद ही सोचिये एक इंसान , अगर अचानक मर जाए और उसके बाद , उसके होने का एहसास हो , तो हम डर जाते है | हम उसे भूत- प्रेत सारी संज्ञा दे डालते है उससे डरेंगे वो जिस जगह पर महसूस होता है या दिख जाता है , हमारी घिघ्घी बन्ध जाती है | आखिर हम डरते क्यों है ? जो जीवन भर कमजोर रहा जो जीवन भर बेबस रहा उसकी आत्मा में ऐसी कौन सी तूफानी शक्ति आ गयी है  ,जो वो हमारा कुछ बिगाड़ लेगा | आप शायद उत्तर देंगे की अरे अब वो आत्मा हो गयी है आत्मा में बहुत शक्ति रहती है तो हें प्रभु आत्मा तो शक्तिशाली आपकी भी होगी उस बेचारी आत्मा के पास शरीर नही है ।  आपके पास तो शरीर भी है ।  आप अपनी शक्तियों को क्यों भूले हुए हैं | आप सोचिये विचारिए कि आप के लिए क्या मुश्किल है ? अब आप इस बात पर भी ध्यान दें , कि अगर आप की आत्म…